भ्रष्ट हिसार,
हरियाणा के पुलिस अधिकारी द्वारा दबंगों की चाटुकारिता के लिये अदालती आदेश की अवहेलना
देश में गरीबी, अज्ञानता
व अशिक्षा की वजह से भ्रष्ट अधिकारियों, नेताओं व अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो
गये हैं कि अब वे खुले आम कानून की धज्जियाँ उडाते हुये आम इंसानों का शोषण करने से
भी नहीं घबराते और कानून को अपनी ठोकर पर रखते हैं| अदालती आदेशों का पालन करना पुलिस
अधिकारियों व सरकारी अफसरों को अपनी शान के खिलाफ नजर आता है| यह मामला तहसील व जिला- हिसार, गांव- डाबड़ा, थाना- सदर का है|
इस मामले में
एक विधवा की उस जमीन को धोखाधड़ी करते हुये हथियाने की कोशिश की जा रही हैं, जिसमें
चचेरे भाई ने रिश्तेदारी में विश्वास का गला घोंटते हुये एक कोरे कागज़ पर विधवा के
बेटे श्री. राजेश सिंगला और उनके परिवार के सद्स्यों से हस्ताक्षर करवाये, जो हस्ताक्षर
उसने बिजली का connection, संबंधित जगह पर लेने के लिये लिया था| यह हस्ताक्षर बेटे
श्री. राजेश सिंगला ने विश्वास के आधार पर अपने चचेरे भाई को दिया था उस विश्वास का
गला घोंटते हुये उस चचेरे भाई ने उस हस्ताक्षर वाले पेपर का उपयोग जमीन के टुकड़े की
बिक्री के रूप में दिखाते हुये किया, जिसमें उनका भी नाम दिखाया गया है जिनकी मृत्यु
तैयार किये गये पेपर से 4 वर्ष पहले ही हो चुकी थी साथ ही दो महिलाएं फूलीदेवी और प्रेमकुमारी
जो भुखण्ड की मालिक भी नहीं थी उनको भी बेचने वालों के रूप में दिखा दिया.
दरअसल यह मामला
हरियाणा सरकार के सिंचाई मंत्री श्री. रणदीप सिंह सुरजेवाला
के इर्द-गिर्द घूम रहा है इस पूरे मामले में तीन किरदार मुख्य भूमिका निभा रहे
हैं, जिसमें एक है खुद को मंत्री जी का पी.ए. कहने वाला
विक्रम बेनीवाल, दूसरा है विजय कालड़ा और तीसरा है विधवा के जेठ का लड़का पवन कुमार|
इन तीनों की तिकडी मिल मंत्रीजी के नाम का उपयोग कर के क्षेत्र के थाना सदर व अदालतों
को पूरी तरह से गुमराह करते हुये अपने घिनौने कार्य को गैर कानूनी तरीके से ज़मीन हड़पने
के लिये कर रहे हैं | इन घोखेबाज़ तिकड़ी ने जो फर्जी दस्तावेज़
तैयार करते हुये अदालत में पेश किये उसे पहली नज़र में ही निचली अदालत ने बर्खास्त कर
दिया| इसके अलावा ऊपरी अदालती ने भी आवेदन को बर्खास्त कर दिया| इस पूरे मामले
में थाने के संबंधित अधिकारियों को चाहिये था कि इस तिकडी के खिलाफ, धोखाधड़ी करते हुये
कागजात तैयार करने और अदालत को गुमराह करने के लिये F.I.R. दर्ज करने का कार्य करते,
मगर इन संबंधित पुलिस अधिकारियों ने मंत्री के नाम के प्रभाव में रहते हुये इस तिकड़ी
के खिलाफ तो कोई कार्यवाही की ही नहीं बल्कि इन तीनों के कहने पर विधवा के बेटे के
खिलाफ 420 के मामले में F.I.R. दर्ज कर दी|